दशहरा 2026: रावण दहन से पहले जानें इस त्योहार का असली अर्थ, इतिहास और पूजा विधि — पूरी जानकारी हिंदी में
दशहरा 2026: रावण दहन से पहले जानें इस त्योहार का असली अर्थ, इतिहास और पूजा विधि — पूरी जानकारी हिंदी में
नमस्ते दोस्तों! 🙏
मेरा नाम भानु प्रताप सिंह है — और आज बात करेंगे उस त्योहार की जिसका इंतजार नवरात्रि शुरू होते ही होने लगता है।
दशहरा का नाम सुनते ही मेरी आँखों के सामने एक तस्वीर आ जाती है। हमारे गाँव के मैदान में हर साल एक बहुत बड़ा रावण बनता था। मेरे दोस्त राजू के चाचा जी उसे बनाते थे — पूरे एक हफ्ते लगाते थे। बाँस, कागज़, रंग और पटाखे — सब मिलाकर एक विशाल रावण खड़ा होता था।
जब रात को वो रावण जलता था — तो पूरा मैदान रोशनी से नहा जाता था। हम बच्चे थोड़ी दूर खड़े होकर देखते थे — डर भी लगता था और रोमांच भी। और जब वो गिरता था तो सब एक साथ चिल्लाते थे — "जय श्री राम!"
लेकिन बड़े होने पर एक सवाल मन में आया — "रावण को जलाते हैं हर साल। फिर भी बुराई क्यों नहीं जाती?" मेरे नाना शिवप्रसाद जी ने जवाब दिया था — "बेटा, बाहर का रावण जलाते हो — लेकिन अंदर का रावण तो तुम्हें खुद जलाना होगा।"
उस एक बात ने दशहरे का पूरा अर्थ बदल दिया।
आज इस लेख में मैं आपको दशहरा 2026 की पूरी जानकारी दूँगा — तारीख, महत्व, इतिहास, पूजा विधि और वो बातें जो इस त्योहार को और गहराई से समझने में मदद करेंगी।
दशहरा 2026 — तारीख और शुभ मुहूर्त
दशहरा 2026: 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
दशहरा हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है। इसीलिए इसे "विजयादशमी" भी कहते हैं।
2026 का शुभ मुहूर्त
| विवरण | समय |
|---|---|
| दशमी तिथि आरंभ | 22 अक्टूबर 2026, रात 8:54 बजे |
| दशमी तिथि समाप्त | 23 अक्टूबर 2026, रात 9:01 बजे |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 2:01 से 2:47 बजे |
| अपराह्न पूजा मुहूर्त | दोपहर 1:16 से 3:32 बजे |
| रावण दहन का शुभ समय | शाम 6:00 बजे के बाद |
दशहरे के शुभ मुहूर्त की सटीक जानकारी के लिए Drik Panchang पर जाएं — यह भारत की सबसे विश्वसनीय पंचांग वेबसाइट है।
अगर आप नवरात्रि से दशहरे तक के दिन गिनना चाहते हैं तो Bhakti Vibha का Days Between Dates Calculator बहुत काम का टूल है।
दशहरा क्या है — असली अर्थ जानें
"दशहरा" शब्द के बारे में दो मान्यताएं हैं।
पहली मान्यता — "दश" यानी दस और "हरा" यानी हराया गया। यानी भगवान राम ने दस सिर वाले रावण को हराया।
दूसरी मान्यता — "दश" यानी दस और "हर" यानी हरण। यानी दस बुराइयों का हरण या नाश।
ये दस बुराइयाँ कौन सी हैं? काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी। जब हम रावण को जलाते हैं — तो असल में इन दस बुराइयों को जलाने का संकल्प लेते हैं।
उदाहरण के तौर पर — जैसे दीवाली पर हम घर की सफाई करते हैं और पुरानी बेकार चीजें फेंक देते हैं — वैसे ही दशहरे पर हमें अपने मन की सफाई करनी चाहिए। पुरानी बुरी आदतें, पुरानी दुश्मनी, पुराने अहंकार — यही हमारा रावण है।
मेरे नाना शिवप्रसाद जी की वो बात आज भी सच लगती है।
दशहरे की पौराणिक कथाएं — दो महाकाव्यों से जुड़ा है यह त्योहार
दोस्तों दशहरे के पीछे केवल एक नहीं — बल्कि दो महत्वपूर्ण पौराणिक घटनाएं हैं।
पहली कथा — भगवान राम और रावण युद्ध
सबसे प्रसिद्ध कथा रामायण की है।
लंका के राजा रावण ने माँ सीता का अपहरण किया था। भगवान राम ने हनुमान, सुग्रीव और वानर सेना की मदद से लंका पर चढ़ाई की। नौ दिन तक घमासान युद्ध चला।
दसवें दिन — आश्विन शुक्ल दशमी को — भगवान राम ने रावण का वध किया। और माँ सीता को मुक्त कराया।
यही दिन विजयादशमी बना — यानी विजय का दसवाँ दिन।
रावण एक विद्वान था — चार वेदों का ज्ञाता, महान शिव भक्त। लेकिन अहंकार और काम ने उसे नष्ट कर दिया। इसीलिए रावण केवल एक व्यक्ति का प्रतीक नहीं — वो हर उस बुराई का प्रतीक है जो इंसान को अंदर से खोखला कर देती है।
दूसरी कथा — माँ दुर्गा और महिषासुर युद्ध
दूसरी कथा माँ दुर्गा से जुड़ी है।
महिषासुर — एक अत्यंत शक्तिशाली राक्षस — ने देवताओं को स्वर्ग से भगा दिया था। देवता माँ दुर्गा के पास गए। माँ दुर्गा ने नौ दिन तक महिषासुर से युद्ध किया।
दसवें दिन — आश्विन शुक्ल दशमी को — माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया।
इसीलिए नवरात्रि के बाद दशहरा आता है — नौ दिन की साधना के बाद दसवें दिन विजय।
यह नवरात्रि और दशहरे के बीच का अटूट रिश्ता है। नवरात्रि 2026 की पूरी जानकारी के लिए पढ़ें: नवरात्रि 2026
रावण कौन था — एक अलग नज़रिए से
दोस्तों रावण के बारे में एक बात जो बहुत लोग नहीं जानते — वो यह है कि रावण केवल बुरा नहीं था।
रावण की विद्वत्ता और शिव भक्ति
रावण चारों वेदों का ज्ञाता था। वो एक महान संगीतकार था। रावण ने "शिव तांडव स्तोत्र" की रचना की — जो आज भी भगवान शिव के सबसे प्रिय स्तोत्रों में से एक है।
रावण एक कुशल शासक था। लंका को "सोने की लंका" कहा जाता था — उसके राज में प्रजा सुखी थी।
तो फिर रावण गलत क्यों हुआ?
अहंकार। रावण को अपनी विद्वत्ता, अपनी शक्ति और अपने वरदानों पर इतना घमंड हो गया कि उसने एक बड़ी गलती की — माँ सीता का अपहरण।
और वो एक गलती उसके पूरे जीवन की सभी उपलब्धियों पर भारी पड़ गई।
उदाहरण के तौर पर — जैसे मेरे दोस्त सुनील के एक परिचित थे — बहुत होशियार इंजीनियर। लेकिन एक बार अहंकार में आकर उन्होंने एक गलत निर्णय लिया — और सालों की मेहनत बर्बाद हो गई। सुनील कहता है — "यार, रावण वाली गलती है यह।"
रावण की कहानी बताती है — ज्ञान और शक्ति तब तक ही वरदान हैं जब तक अहंकार न आए।
दशहरे की पूजा विधि — विजयादशमी पर क्या करें
सुबह की पूजा
दशहरे की सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को साफ करें।
भगवान राम की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाएं। रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें।
राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें — यह दशहरे पर बेहद शुभ माना जाता है।
राम रक्षा स्तोत्र को विस्तार से पढ़ने के लिए गीता प्रेस गोरखपुर पर जाएं।
शस्त्र पूजा — एक प्राचीन परंपरा
दशहरे पर शस्त्र पूजा की परंपरा बहुत पुरानी है।
उस काल में योद्धा अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करते थे। आज के समय में किसान अपने औजारों की, व्यापारी अपनी बहियों की और कारीगर अपने उपकरणों की पूजा करते हैं।
उदाहरण के तौर पर — मेरे दादाजी रामस्वरूप सिंह किसान थे। दशहरे पर वो अपने हल और कुदाल को साफ करके पूजते थे। वो कहते थे — "बेटा, जो चीज़ हमें रोटी देती है — उसका सम्मान करना हमारा धर्म है।"
यह परंपरा बताती है कि हर काम पवित्र है — बस उसे समर्पण और श्रद्धा से करना होता है।
विजय मुहूर्त में नया काम शुरू करें
विजयादशमी पर विजय मुहूर्त में नया काम शुरू करना बेहद शुभ माना जाता है।
नई नौकरी शुरू करना, नया व्यापार खोलना, नया घर लेना, पढ़ाई शुरू करना — यह सब इस दिन शुरू करने की परंपरा है।
2026 में विजय मुहूर्त: दोपहर 2:01 से 2:47 बजे तक।
रावण दहन — कैसे और क्यों
शाम को रावण दहन होता है। रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं।
रावण दहन से पहले रामलीला का आयोजन होता है — जिसमें राम-रावण युद्ध का मंचन होता है।
जब रावण जलता है — तो उस पल एक संकल्प लें — "मेरे अंदर जो बुराई है, जो अहंकार है, जो क्रोध है — आज उसे भी जलाता हूँ।"
यही दशहरे की असली पूजा है।
भारत के अलग-अलग राज्यों में दशहरा
दशहरा पूरे भारत में मनाया जाता है — लेकिन हर जगह का अपना रंग है।
मैसूर का दशहरा — देश का सबसे भव्य उत्सव
मैसूर का दशहरा पूरे भारत में प्रसिद्ध है। कर्नाटक सरकार इसे "नाडा हब्बा" यानी राज्य उत्सव के रूप में मनाती है।
दस दिनों तक मैसूर पैलेस को लाखों दीपों से सजाया जाता है। विजयादशमी पर एक भव्य जुलूस निकलता है — जिसमें सजे-धजे हाथी, घोड़े, बैंड और पारंपरिक वेशभूषा में लोग होते हैं।
यह जुलूस देखने के लिए लाखों लोग मैसूर आते हैं।
कुल्लू का दशहरा — पहाड़ों में उत्सव
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू का दशहरा भी बेहद प्रसिद्ध है। यहाँ दशहरा 7 दिन तक चलता है।
खास बात यह है कि कुल्लू में दशहरे पर रावण दहन नहीं होता। यहाँ भगवान राम के विजय के उपलक्ष्य में रथयात्रा निकाली जाती है।
बस्तर का दशहरा — 75 दिन तक चलता है
छत्तीसगढ़ के बस्तर का दशहरा दुनिया का सबसे लंबा दशहरा उत्सव है — यह 75 दिन तक चलता है।
यहाँ यह उत्सव माँ दंतेश्वरी को समर्पित है और इसमें आदिवासी परंपराएं बहुत महत्वपूर्ण हैं।
वाराणसी का दशहरा — रामलीला की भव्यता
वाराणसी की रामलीला UNESCO द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में शामिल है। यहाँ की रामलीला 31 दिन तक चलती है।
भारत के विभिन्न उत्सवों की जानकारी के लिए India Tourism की वेबसाइट पर जाएं।
दशहरे पर क्या करें और क्या न करें
इस दिन जरूर करें
सुबह स्नान करके भगवान राम की पूजा करें। विजय मुहूर्त में कोई नया और शुभ काम शुरू करें। शाम को परिवार के साथ रावण दहन देखने जाएं।
किसी से पुरानी दुश्मनी हो तो आज उसे खत्म करें — क्योंकि यह विजय का दिन है और विजय केवल दूसरों पर नहीं — अपनी बुराइयों पर भी होनी चाहिए।
बड़ों का आशीर्वाद लें। इस दिन आशीर्वाद लेने की परंपरा बेहद पुरानी है।
इस दिन न करें
झगड़ा और विवाद न करें — यह दिन सकारात्मकता का है। शराब और नशे से दूर रहें।
रावण दहन में पटाखे फोड़ते समय बच्चों का विशेष ध्यान रखें। भीड़ में सावधानी बरतें।
दशहरे पर "शमी वृक्ष" की पूजा — एक अनोखी परंपरा
दोस्तों दशहरे से जुड़ी एक ऐसी परंपरा है जो बहुत कम लोग जानते हैं।
विजयादशमी पर शमी वृक्ष की पूजा की जाती है।
शमी वृक्ष और महाभारत का रिश्ता
महाभारत में जब पांडव 12 साल के वनवास और 1 साल के अज्ञातवास पर थे — तो उन्होंने अपने अस्त्र-शस्त्र एक शमी वृक्ष पर छुपाए थे।
अज्ञातवास खत्म होने के बाद विजयादशमी के दिन ही उन्होंने वो शस्त्र वापस लिए और युद्ध के लिए तैयार हुए।
इसीलिए दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा और उसके पत्ते एक-दूसरे को देने की परंपरा है। यह पत्ते "सोना" के प्रतीक के रूप में दिए जाते हैं।
मेरी दादी सावित्री देवी दशहरे पर पड़ोसियों को शमी के पत्ते देती थीं। हम बच्चे पूछते थे — "दादी, यह पत्ते क्यों?" वो कहती थीं — "बेटा, यह सोना है — इसे देने से घर में बरकत आती है।"
उस वक्त नहीं समझे — लेकिन आज समझ आता है कि दादी कितनी गहरी बात कहती थीं।
दशहरा और रामलीला — एक सांस्कृतिक धरोहर
रामलीला दशहरे का अभिन्न हिस्सा है। रामलीला में राम के जन्म से लेकर रावण वध तक की कहानी का मंचन होता है।
रामलीला का इतिहास
रामलीला की परंपरा गोस्वामी तुलसीदास के समय से शुरू हुई मानी जाती है। उन्होंने रामचरितमानस लिखी — और उसी पर आधारित रामलीला का मंचन शुरू हुआ।
आज भारत में हर छोटे-बड़े शहर और गाँव में रामलीला होती है। यह केवल एक नाटक नहीं — यह एक जीवित परंपरा है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।
उदाहरण के तौर पर — मेरे गाँव में हर साल रामलीला में राजू के पिताजी राम का किरदार निभाते थे। पूरा गाँव उन्हें उस दौरान "राम जी" कहकर बुलाता था। वो खुद बताते थे — "जब रावण का वध करता हूँ तो एक अजीब सी शक्ति आती है — मानो सच में राम जी मेरे अंदर आ गए हों।"
यही है रामलीला की ताकत — यह कला नहीं, भक्ति है।
दशहरे का वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व
दोस्तों दशहरे को केवल एक धार्मिक त्योहार की तरह देखना — इसकी गहराई को कम आँकना है।
सामाजिक दृष्टिकोण
दशहरा एक सामाजिक संदेश देता है। रावण के दस सिर — दस बुराइयों के प्रतीक — जब जलते हैं तो समाज को यह याद दिलाया जाता है कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली हो — अंत में हारती है।
यह संदेश आज के समय में और भी प्रासंगिक है — जब भ्रष्टाचार, झूठ और अन्याय हर जगह दिखता है।
मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण
रावण दहन एक प्रकार का मनोवैज्ञानिक अनुभव भी है। जब हम किसी बुराई को प्रतीकात्मक रूप से जलाते हैं — तो मन में एक संकल्प बनता है।
उदाहरण के तौर पर — जैसे कागज़ पर अपनी बुरी आदतें लिखकर जलाने की थेरेपी होती है — दशहरे का रावण दहन भी कुछ ऐसा ही काम करता है। यह हमें बुराई छोड़ने का संकल्प दिलाता है।
दशहरे पर बनने वाले पारंपरिक पकवान
हर त्योहार का एक स्वाद होता है। दशहरे पर कुछ खास पकवान बनते हैं।
जलेबी: उत्तर भारत में दशहरे पर जलेबी खाना एक परंपरा है। गर्म जलेबी और ठंडा दूध — यह जोड़ी दशहरे की पहचान है।
फाफड़ा: गुजरात में दशहरे पर फाफड़ा और जलेबी खाने की परंपरा है।
पंचकूट: राजस्थान में दशहरे पर पंचकूट की सब्जी बनाई जाती है।
चकली और करंजी: महाराष्ट्र में दशहरे पर ये पकवान बनते हैं।
मेरी माँ दशहरे पर घर में जलेबी बनाती थीं। वो कहती थीं — "बेटा, त्योहार पर घर का बना खाना खाओ — बाहर का नहीं। घर के खाने में माँ की दुआ मिली होती है।"
दशहरा 2026 — क्या खास होगा इस साल
2026 में दशहरा शुक्रवार को है। शुक्रवार को माँ लक्ष्मी का दिन माना जाता है।
इस दिन विजय मुहूर्त में नया व्यापार शुरू करना — या किसी बड़े काम की शुरुआत करना — विशेष रूप से शुभ माना जाएगा।
नवरात्रि के ठीक बाद आने वाला यह दशहरा — माँ दुर्गा की नौ दिन की उपासना के बाद विजय का उत्सव — यह संयोग हर साल आता है लेकिन हर साल एक नई ऊर्जा लेकर।
नवरात्रि 2026 की पूरी जानकारी और घटस्थापना मुहूर्त के लिए हमारी साइट पर नवरात्रि 2026 की पोस्ट जरूर पढ़ें।
माँ दुर्गा के आशीर्वाद के साथ दशहरे पर नया संकल्प लें। यात्रा के लिए उम्र की जाँच करनी हो या किसी और काम के लिए Bhakti Vibha का Age Calculator भी बहुत उपयोगी है।
अंदर के रावण को कैसे जलाएं — व्यावहारिक सुझाव
दोस्तों नाना शिवप्रसाद जी की बात याद है — "बाहर का रावण जलाते हो — लेकिन अंदर का रावण खुद जलाना होगा।"
तो इस दशहरे पर अंदर के रावण को जलाने के लिए कुछ व्यावहारिक कदम:
क्रोध — पहला सिर
एक काम करें — जिस इंसान पर सबसे ज़्यादा गुस्सा है — उसे आज फोन करें। बस इतना कहें — "सब ठीक है?" देखिए क्या होता है।
अहंकार — दूसरा सिर
आज किसी एक काम में खुद को "गलत" मान लें — भले ही आपको लगे कि आप सही हैं। यह अहंकार के सबसे बड़े दुश्मन को जलाना है।
आलस्य — तीसरा सिर
वो एक काम जो बहुत दिनों से टाल रहे हैं — आज शुरू करें। बस शुरू करना है — पूरा करना ज़रूरी नहीं।
उदाहरण के तौर पर — मेरे दोस्त राजू ने पिछले दशहरे पर संकल्प लिया था कि रोज़ सुबह व्यायाम करेगा। एक साल बाद वो कहता है — "भानु भाई, उस दिन से आज तक नहीं छोड़ा।" राजू का आलस्य जल गया।
यही है असली दशहरा।
एकलव्य ने भी आलस्य और निराशा को जलाया था — और अपनी लगन से वो हासिल किया जो किसी ने नहीं सोचा था। उनकी प्रेरक कथा पढ़ने के लिए हमारी Katha category में जाएं।
यात्रा हो या त्योहार — जप माला साथ रखें। Bhakti Vibha का 📿 Digital Mala कहीं भी इस्तेमाल कर सकते हैं — "राम राम" या "हर हर महादेव" जपने के लिए।
जाते जाते...
दोस्तों इस दशहरे पर एक काम जरूर करें।
जब रावण जल रहा हो — तो बस एक पल के लिए रुकें। भीड़ से थोड़ा अलग जाएं। आँखें बंद करें। और मन में पूछें — "मेरे अंदर कौन सा रावण है जो मुझे आगे नहीं बढ़ने दे रहा?"
जो जवाब आए — उसे आज जलाने का संकल्प लें।
यही दशहरे की असली पूजा है। यही भगवान राम की असली विजय है।
नाना शिवप्रसाद जी की वो बात आज भी सबसे सच लगती है — "बेटा, बाहर का रावण तो हर साल जलता है। लेकिन जिस दिन अंदर का रावण जला लोगे — उस दिन असली दशहरा होगा।"
जय श्री राम! 🙏
— भानु प्रताप सिंह, Bhakti Vibha
Disclaimer
इस लेख में दी गई तिथियाँ और मुहूर्त पारंपरिक पंचांग गणना पर आधारित हैं। अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य करें। Bhakti Vibha किसी भी व्यक्तिगत परिणाम के लिए उत्तरदायी नहीं है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें