नवरात्रि 2026: माँ दुर्गा के नौ स्वरूप, पूजा विधि, व्रत के नियम और शुभ मुहूर्त — संपूर्ण जानकारी हिंदी में
नवरात्रि 2026: माँ दुर्गा के नौ स्वरूप, पूजा विधि, व्रत के नियम और शुभ मुहूर्त — संपूर्ण जानकारी हिंदी में
नमस्ते दोस्तों! 🙏
मेरा नाम भानु प्रताप सिंह है — और आज बात करेंगे उस पर्व की जिसका इंतजार हर साल बड़ी बेसब्री से होता है।
नवरात्रि का नाम सुनते ही मन में एक अलग ही उत्साह जाग जाता है। मुझे याद है बचपन में जब नवरात्रि शुरू होती थी — तो हमारे घर का माहौल पूरी तरह बदल जाता था। माँ सुबह चार बजे उठ जाती थीं। घर में धूप और अगरबत्ती की खुशबू फैली रहती थी। शाम को पूरा परिवार एक साथ बैठकर दुर्गा चालीसा पढ़ता था।
मेरी नानी कमला देवी नवरात्रि में नौ दिन पूरा व्रत रखती थीं। एक बार मैंने उनसे पूछा — "नानी, इतने कड़े व्रत क्यों रखती हो? थक नहीं जातीं?" नानी ने मुस्कुराते हुए कहा — "बेटा, जब माँ के लिए कुछ करते हैं तो थकान नहीं लगती। थकान तो तब लगती है जब मन नहीं होता।"
उस दिन मुझे समझ आया कि व्रत का असली अर्थ क्या है। यह सिर्फ खाना छोड़ना नहीं — यह एक संकल्प है, एक समर्पण है।
आज इस लेख में मैं आपको नवरात्रि 2026 की हर ज़रूरी जानकारी दूँगा — तारीख, शुभ मुहूर्त, माँ दुर्गा के नौ स्वरूप, पूजा विधि, व्रत के नियम और वो बातें जो हर भक्त को जाननी चाहिए।
नवरात्रि 2026 — तारीख और शुभ मुहूर्त
सबसे पहले वो जानकारी जो सबसे ज़्यादा पूछी जाती है।
शारदीय नवरात्रि 2026: 14 अक्टूबर से 22 अक्टूबर 2026
दशहरा: 23 अक्टूबर 2026
घटस्थापना मुहूर्त 2026
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। इसे सही मुहूर्त में करना बेहद जरूरी माना जाता है।
| विवरण | समय |
|---|---|
| घटस्थापना तिथि | 14 अक्टूबर 2026, बुधवार |
| शुभ मुहूर्त | सुबह 6:20 से 7:45 बजे तक |
| अभिजीत मुहूर्त | दोपहर 11:44 से 12:30 बजे तक |
| प्रतिपदा तिथि आरंभ | 13 अक्टूबर को रात 11:28 बजे |
| प्रतिपदा तिथि समाप्त | 14 अक्टूबर को रात 11:54 बजे |
मुहूर्त की सटीक और विस्तृत जानकारी के लिए Drik Panchang पर जाएं — यह भारत की सबसे विश्वसनीय पंचांग वेबसाइट है।
नवरात्रि क्या है यह क्यों मनाई जाती ?
"नवरात्रि" शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है — नव यानी नौ और रात्रि यानी रात। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की जाती है।
लेकिन नवरात्रि केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है। इसके पीछे एक गहरा वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारण भी है। साल में दो बार नवरात्रि आती है — चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल) और शारदीय नवरात्रि (अक्टूबर)। यह दोनों समय ऋतु परिवर्तन के समय होते हैं।
हमारे ऋषि-मुनियों ने यह जाना था कि इन दोनों समयों में शरीर को विशेष देखभाल की ज़रूरत होती है। व्रत रखने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर की आंतरिक शुद्धि होती है।
उदाहरण के तौर पर — जैसे एक कार को समय-समय पर सर्विसिंग की ज़रूरत होती है — उसी तरह हमारे शरीर को भी साल में दो बार यह "रीसेट" चाहिए। नवरात्रि का व्रत वही काम करता है।
माँ दुर्गा के नौ स्वरूप — नवदुर्गा का विस्तृत परिचय
नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के नौ विशिष्ट रूपों की आराधना की जाती है। प्रत्येक स्वरूप अपनी अलग विशेषता, धार्मिक महत्व, प्रिय रंग और पूजन मंत्र के लिए जाना जाता है।
पहला दिन: माँ शैलपुत्री
14 अक्टूबर 2026
माँ शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। "शैल" का अर्थ है पर्वत। ये अपने दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण करती हैं। वृषभ यानी बैल इनका वाहन है।
माँ शैलपुत्री स्थिरता और दृढ़ता की प्रतीक हैं। जीवन में जब हम डगमगाते हैं — तब माँ शैलपुत्री की उपासना मन को स्थिर करती है।
पूजा का रंग: पीला
मंत्र: "ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः"
दूसरा दिन: माँ ब्रह्मचारिणी
15 अक्टूबर 2026
माँ ब्रह्मचारिणी तपस्या की देवी हैं। इन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हज़ारों साल तक कठोर तपस्या की थी।
ये सफेद वस्त्र धारण करती हैं। दाहिने हाथ में जप माला और बाएं हाथ में कमंडल है। माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना से धैर्य, संयम और साहस की प्राप्ति होती है।
मेरी नानी कमला देवी कहती थीं — "बेटा, माँ ब्रह्मचारिणी ने हज़ारों साल तपस्या की — और हम एक दिन के व्रत में थक जाते हैं। उनकी कथा पढ़ो तो हिम्मत आ जाती है।"
पूजा का रंग: सफेद
मंत्र: "ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः"
तीसरा दिन: माँ चंद्रघंटा
16 अक्टूबर 2026
माँ चंद्रघंटा के माथे पर अर्धचंद्र है जो घंटे के आकार का है — इसीलिए इन्हें चंद्रघंटा कहते हैं। इनका रूप बेहद तेजस्वी है। दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र हैं।
माँ चंद्रघंटा वीरता और साहस की देवी हैं। इनकी उपासना से जीवन में व्याप्त कठिनाइयाँ दूर होती हैं।
पूजा का रंग: लाल
मंत्र: "ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः"
चौथा दिन: माँ कूष्माण्डा
17 अक्टूबर 2026
माँ कूष्माण्डा को ब्रह्माण्ड की सृष्टिकर्ता माना जाता है। "कूष्माण्ड" का अर्थ है कुम्हड़ा — माँ को कुम्हड़े की बलि प्रिय है।
इनकी उपासना से स्वास्थ्य, ऊर्जा और आयु में वृद्धि होती है। जो लोग लंबे समय से बीमार हों — उनके लिए माँ कूष्माण्डा की उपासना विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है।
पूजा का रंग: नीला
मंत्र: "ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः"
पाँचवाँ दिन: माँ स्कंदमाता
18 अक्टूबर 2026
माँ स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। इनकी गोद में बालरूप में कार्तिकेय बैठे हैं। इनका वाहन सिंह है।
माँ स्कंदमाता की उपासना से संतान सुख और परिवार में शांति आती है। जो माता-पिता अपनी संतान के लिए चिंतित रहते हैं — उन्हें माँ स्कंदमाता की उपासना करनी चाहिए।
पूजा का रंग: पीला
मंत्र: "ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः"
छठा दिन: माँ कात्यायनी
19 अक्टूबर 2026
यह शक्ति और युद्ध की देवी हैं। इन्होंने महिषासुर का वध किया था। विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए माँ कात्यायनी की उपासना की जाती है।
उदाहरण के तौर पर — मेरे दोस्त सुनील की बहन का विवाह कई साल से नहीं हो पा रहा था। उनकी माँ ने नवरात्रि में माँ कात्यायनी का विशेष व्रत रखा। उसी साल विवाह संपन्न हुआ। यह श्रद्धा की बात है — लेकिन ऐसे अनुभव बहुत लोगों के जीवन में होते हैं।
पूजा का रंग: हरा
मंत्र: "ॐ देवी कात्यायन्यै नमः"
सातवाँ दिन: माँ कालरात्रि
20 अक्टूबर 2026
माँ कालरात्रि नवदुर्गा का सबसे भयंकर रूप हैं। इनका रंग काला है, बाल खुले हुए हैं और इनके तीन नेत्र हैं।
लेकिन यह रूप देखने में भले ही भयंकर लगे — माँ कालरात्रि शुभंकरी हैं यानी शुभ करने वाली। ये अपने भक्तों के सभी भय और नकारात्मकता को नष्ट करती हैं।
पूजा का रंग: सलेटी (Grey)
मंत्र: "ॐ देवी कालरात्र्यै नमः"
आठवाँ दिन: माँ महागौरी — महाअष्टमी
21 अक्टूबर 2026
माँ महागौरी का रंग बिल्कुल गौरा यानी सफेद है। कहा जाता है कि माँ पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए जो कठोर तप किया — उससे उनका रंग काला पड़ गया था। शिव जी ने गंगाजल से उन्हें स्नान करवाया और वो पुनः गौरी यानी गोरी हो गईं।
महाअष्टमी नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन कन्या पूजन किया जाता है।
पूजा का रंग: बैंगनी
मंत्र: "ॐ देवी महागौर्यै नमः"
नौवाँ दिन: माँ सिद्धिदात्री — महानवमी
22 अक्टूबर 2026
माँ सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों को देने वाली देवी हैं। अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व — ये आठ सिद्धियाँ माँ सिद्धिदात्री देती हैं।
महानवमी पर नवरात्रि का समापन होता है। इस दिन हवन किया जाता है और कन्या पूजन के साथ व्रत का उद्यापन होता है।
पूजा का रंग: मोर जैसा हरा
मंत्र: "ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः"
नवदुर्गा के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए गीता प्रेस गोरखपुर पर जाएं जहाँ दुर्गा सप्तशती और देवी पुराण हिंदी में उपलब्ध हैं।
घटस्थापना की संपूर्ण विधि — Step by Step
दोस्तों नवरात्रि का सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है घटस्थापना। इसे सही तरीके से करने से नौ दिन की पूजा का फल मिलता है।
घटस्थापना की सामग्री
घटस्थापना से पहले यह सामग्री तैयार रखें:
मिट्टी का कलश, शुद्ध जल, आम के पत्ते, नारियल, लाल कपड़ा, जौ बोने के लिए मिट्टी, माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र, रोली, अक्षत, सुपारी, दूर्वा, फूल और फूलमाला, धूप और दीप।
घटस्थापना की विधि
पहला कदम: पूजा स्थान को साफ करें और वहाँ लाल कपड़ा बिछाएं।
दूसरा कदम: एक थाली में मिट्टी बिछाएं और उसमें जौ बोएं। यह जौ नौ दिनों में अंकुरित होंगे — जिन्हें "ज्वारे" कहते हैं।
तीसरा कदम: कलश में शुद्ध जल भरें। उसमें सुपारी, सिक्का और दूर्वा डालें।
चौथा कदम: कलश के मुँह पर आम के पाँच पत्ते रखें। ऊपर नारियल स्थापित करें।
पाँचवाँ कदम: कलश पर लाल कपड़ा बाँधें और उस पर स्वस्तिक बनाएं।
छठा कदम: माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र कलश के पास स्थापित करें।
सातवाँ कदम: यह मंत्र पढ़ते हुए कलश स्थापित करें:
"ॐ आयां गौ: पृश्निरक्रमीदसदन्मातरं पुनः।
पितरं च प्रयन्त्स्वः।।"
आठवाँ कदम: दीप जलाएं और माँ दुर्गा की आरती करें।
नवरात्रि व्रत के नियम — जो हर भक्त को जानने चाहिए
दोस्तों व्रत रखना एक संकल्प है। और संकल्प को सही तरीके से निभाने के लिए कुछ नियम जानना जरूरी है।
व्रत में क्या खाएं
व्रत में फल, साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, आलू, मखाना, दूध और दही खा सकते हैं। सेंधा नमक का उपयोग करें — साधारण नमक नहीं।
उदाहरण के तौर पर — मेरी माँ नवरात्रि में कुट्टू के आटे की पूरी और आलू की सब्जी बनाती थीं। साथ में एक गिलास दूध। यह भोजन पौष्टिक भी था और व्रत के नियमों के अनुसार भी।
व्रत में क्या न खाएं
अनाज जैसे गेहूँ, चावल और दाल — व्रत के दौरान वर्जित हैं। प्याज और लहसुन पूरी तरह बंद। माँसाहार और शराब से दूर रहें। साधारण नमक की जगह सेंधा नमक लें।
व्रत के आचरण के नियम
इन नौ दिनों में मन, वचन और कर्म तीनों को पवित्र रखें। किसी से झगड़ा न करें, किसी की बुराई न करें। सात्विक जीवन जिएं — क्रोध और अहंकार से दूर रहें।
नाखून और बाल न काटें — यह पारंपरिक नियम है। चमड़े के जूते-चप्पल पहनने से बचें।
कन्या पूजन — नवरात्रि का सबसे भावपूर्ण अनुष्ठान
नवरात्रि में अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन होता है। यह नवरात्रि का सबसे प्रिय और भावपूर्ण अनुष्ठान है।
कन्या पूजन की विधि
दो से दस साल की नौ कन्याओं को घर बुलाएं। उनके पाँव धोएं। माथे पर तिलक लगाएं। हाथ में मोली बाँधें।
इसके बाद उन्हें भोजन कराएं — पूरी, हलवा, चना और खीर पारंपरिक भोजन है। भोजन के बाद उन्हें उपहार दें — लाल चुनरी, बाली या कोई और उपहार।
अंत में उनके चरण स्पर्श करें और आशीर्वाद लें।
मेरे दादाजी रामस्वरूप सिंह हमेशा कहते थे — "बेटा, जब उन नौ बच्चियों के चेहरे पर मुस्कान आती है — तो समझो माँ दुर्गा खुश हुईं। क्योंकि वो नौ बच्चियाँ माँ के ही नौ रूप हैं।"
दुर्गा सप्तशती — नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण पाठ
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना सबसे शुभ माना जाता है। यह 700 श्लोकों का एक पवित्र ग्रंथ है जो मार्कण्डेय पुराण का हिस्सा है।
यदि पूरा पाठ संभव न हो तो कम से कम देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलकम का पाठ रोज करें।
एक सरल उपाय — अगर संस्कृत समझ न आए तो हिंदी अनुवाद के साथ पढ़ें। भाव महत्वपूर्ण है — भाषा नहीं। दुर्गा सप्तशती को हिंदी अनुवाद सहित गीता प्रेस की वेबसाइट पर देखें।
नवरात्रि पर नौ रंगों की परंपरा
नवरात्रि के नौ दिन अलग-अलग रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा है। यह परंपरा माँ के नौ रूपों से जुड़ी है।
| दिन | माँ का रूप | शुभ रंग |
|---|---|---|
| पहला | शैलपुत्री | पीला |
| दूसरा | ब्रह्मचारिणी | सफेद |
| तीसरा | चंद्रघंटा | लाल |
| चौथा | कूष्माण्डा | नीला |
| पाँचवाँ | स्कंदमाता | पीला |
| छठा | कात्यायनी | हरा |
| सातवाँ | कालरात्रि | सलेटी |
| आठवाँ | महागौरी | बैंगनी |
| नौवाँ | सिद्धिदात्री | मोर हरा |
नवरात्रि और गरबा — एक अनूठी परंपरा
नवरात्रि और गरबा का रिश्ता बहुत पुराना है। गुजरात में गरबा नवरात्रि का अभिन्न हिस्सा है।
"गरबा" शब्द "गर्भदीप" से आया है — यानी वो दीपक जो गर्भ की तरह जीवन का प्रतीक है। गोलाकार नृत्य करना — यह सृष्टि के चक्र का प्रतीक है।
आज गरबा केवल गुजरात में नहीं — पूरे भारत में मनाया जाता है। डांडिया और गरबा की रातें नवरात्रि को और भी उत्सवमय बना देती हैं।
मेरे दोस्त राजू एक बार गुजरात में नवरात्रि के समय गए थे। वापस आकर उन्होंने कहा — "भानु भाई, अहमदाबाद में नवरात्रि देखनी हो तो एक बार जरूर जाओ। वो दृश्य ज़िंदगी भर नहीं भूलता।"
गरबा की परंपरा और इतिहास के बारे में India Tourism की वेबसाइट पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।
नवरात्रि और विज्ञान — दादी की बात में था दम
दोस्तों नवरात्रि के व्रत को कुछ लोग केवल धार्मिक मानते हैं। लेकिन इसके पीछे एक वैज्ञानिक आधार भी है।
अक्टूबर में मौसम बदलता है — गर्मी जाती है और ठंड आती है। इस समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर पड़ सकती है। हल्का और सात्विक भोजन करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर नई ऋतु के लिए तैयार होता है।
साबूदाना — जो व्रत में खाया जाता है — कार्बोहाइड्रेट से भरपूर है और ऊर्जा देता है। कुट्टू में प्रोटीन और फाइबर होता है। मखाना में कैल्शियम होता है।
यानी व्रत का खाना केवल "फलाहार" नहीं — यह एक संतुलित और पौष्टिक आहार है जो हमारे पूर्वजों ने बड़े सोच-समझकर बनाया था।
नवरात्रि में माँ दुर्गा की आरती
नौ दिनों में सुबह और शाम माँ दुर्गा की आरती करना अनिवार्य है। यहाँ माँ दुर्गा की आरती के प्रमुख छंद हैं:
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
यह आरती पूरी पढ़ने के लिए Aarti Sangrah पर जाएं।
जाते जाते...
दोस्तों नवरात्रि केवल एक त्योहार नहीं — यह एक आत्मिक यात्रा है।
इन नौ दिनों में जब हम माँ दुर्गा की उपासना करते हैं — तो हम सिर्फ एक देवी को नहीं पूजते। हम अपने भीतर की उस शक्ति को जगाते हैं जो हमेशा से हमारे अंदर है।
मेरी नानी कमला देवी कहती थीं — "बेटा, माँ दुर्गा बाहर नहीं हैं। वो तुम्हारे अंदर हैं। जब तुम उन्हें पुकारते हो — तो तुम अपनी ही शक्ति को जगाते हो।"
यह नवरात्रि आपके जीवन में नई ऊर्जा, नई उम्मीद और नया विश्वास लेकर आए।
जय माँ दुर्गा! 🙏
— भानु प्रताप सिंह, Bhakti Vibha
Disclaimer
इस लेख में दी गई तिथियाँ और मुहूर्त पारंपरिक पंचांग गणना पर आधारित हैं। अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग या पुरोहित से पुष्टि अवश्य करें। Bhakti Vibha किसी भी व्यक्तिगत परिणाम के लिए उत्तरदायी नहीं है।

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