धनतेरस 2026: पूजा विधि, यम दीपम, खरीदारी की सही जानकारी और इस पर्व की कथा — पूरी जानकारी हिंदी में
धनतेरस 2026: पूजा विधि, यम दीपम, खरीदारी की सही जानकारी और इस पर्व की कथा — पूरी जानकारी हिंदी में
नमस्ते दोस्तों! 🙏
मेरा नाम भानु प्रताप सिंह है, और आज बात करेंगे दीपावली के पाँच दिनों के पहले पर्व की। मेरी दादी सावित्री देवी हर धनतेरस पर एक छोटी सी चीज़ ज़रूर खरीदती थीं। कभी स्टील की कटोरी, कभी पीतल का छोटा चम्मच। बड़ी खरीदारी उनके बजट में कभी नहीं रही।
एक दिन मैंने दादी से जिज्ञासावश पूछा, “दादी, इतनी-सी चीज़ से आखिर क्या फर्क पड़ेगा?" वे हँसकर बोलीं, "बेटा, चीज़ छोटी हो या बड़ी, शुरुआत शुभ भाव से होनी चाहिए। त्योहार हैसियत से नहीं, श्रद्धा से मनता है।"
आज जब धनतेरस पर बाज़ार में होड़ और ऑफ़रों की भीड़ देखता हूँ, तो दादी की यह बात और ज़्यादा याद आती है। इस लेख में आपको धनतेरस 2026 की तारीख, पूजा विधि, यम दीपम, खरीदारी की समझदारी भरी जानकारी और इस पर्व की कथाएँ बताऊँगा।
धनतेरस 2026 कब है?
धनतेरस 2026: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। इसे धनत्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती भी कहते हैं। इस साल दीपावली रविवार, 8 नवंबर 2026 को है, यानी धनतेरस उससे दो दिन पहले आ रही है।
धनतेरस की तारीख में अलग-अलग पंचांग स्रोतों में कोई फर्क नहीं मिला। फर्क सिर्फ पूजा के समय में है, जिस पर नीचे बात करते हैं। बाकी दिनों की तारीखें अपने स्थानीय पंचांग से देख लेना ठीक रहेगा।
पूजा का समय कैसे तय होता है?
धनतेरस की लक्ष्मी-कुबेर पूजा प्रदोष काल में की जाती है। यह सूर्यास्त के बाद का वह समय है जो लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक रहता है। पंचांग में इस दौरान वृषभ लग्न, जिसे स्थिर लग्न माना जाता है, को सबसे अच्छा समय माना गया है।
सूर्यास्त हर शहर में अलग होता है, इसलिए पूजा का समय भी बदलता है। एक पंचांग स्रोत के अनुसार इस साल दिल्ली में प्रदोष काल की पूजा का समय लगभग शाम 5:48 से 7:14 बजे है। मुंबई में यह कुछ देर बाद और कोलकाता में कुछ पहले आता है।
अपने शहर का सही समय कहाँ देखें?
अलग-अलग वेबसाइटों पर मुहूर्त के समय में कुछ मिनटों से लेकर एक घंटे तक का अंतर दिख जाता है। इसीलिए मैं कोई एक समय पक्का बताने के बजाय यह सलाह दूँगा कि अपने शहर के लिए Drik Panchang की धनतेरस पूजा समय वाली पेज खोलकर अपना शहर चुनें। अपने परिवार के पंडित जी से भी एक बार पूछ लें।
और अगर जानना हो कि आज से धनतेरस में कितने दिन बाकी हैं, तो Bhakti Vibha का Days Between Dates Calculator इस्तेमाल कर सकते हैं।
धनतेरस का असली अर्थ क्या है?
"धनतेरस" शब्द दो हिस्सों से बना है। धन और तेरस, यानी त्रयोदशी। लेकिन यहाँ "धन" का मतलब सिर्फ रुपया-पैसा नहीं है।
इस दिन तीन शक्तियों को याद किया जाता है। माँ लक्ष्मी को समृद्धि का, कुबेर को धन के प्रबंधन का और भगवान धन्वंतरि को स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। हमारी परंपरा में इन तीनों को साथ रखा गया है, क्योंकि स्वास्थ्य के बिना धन का सुख अधूरा है।
मेरी नानी कमला देवी अक्सर कहती थीं, "पहला सुख निरोगी काया।" इसीलिए उनके लिए धनतेरस की सबसे बड़ी पूजा धन्वंतरि की होती थी। इसके बाद ही वे लक्ष्मी जी का नाम लेती थीं।
धनतेरस की पहली कथा: भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य
पुराणों में समुद्र मंथन की कथा आती है। देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीर सागर का मंथन किया था। उसमें से कई रत्न निकले, जिनमें माँ लक्ष्मी भी थीं।
अमृत कलश के साथ धन्वंतरि
कथा के अनुसार मंथन के अंत में भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत कलश लिए प्रकट हुए। उन्हें आयुर्वेद के देवता माना जाता है। इसी कारण धनतेरस को धन्वंतरि जयंती भी कहा जाता है।
आज भी बहुत से वैद्य और आयुर्वेदिक संस्थान इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं। आयुर्वेद के देवता का यह पर्व हमें याद दिलाता है कि अपने शरीर और मन की देखभाल भी एक तरह की पूजा ही है।
इस कथा की पौराणिक पृष्ठभूमि पर थोड़ा और पढ़ना चाहें तो Wikipedia के धनतेरस वाले पेज पर संक्षिप्त जानकारी मिल जाएगी।
दूसरी कथा: राजा के पुत्र और यम दीपम की परंपरा
धनतेरस से जुड़ी एक और लोक कथा बहुत प्रसिद्ध है। इसमें दीपक जलाने की परंपरा की जड़ें मिलती हैं।
सोलह साल के राजकुमार की कथा
कथा के अनुसार एक राजा के पुत्र के बारे में भविष्यवाणी हुई थी कि विवाह के चौथे दिन साँप के काटने से उसकी मृत्यु हो जाएगी। राजकुमार की नवविवाहित पत्नी को जब यह बात पता चली तो वह घबराई नहीं।
उसने उस रात अपने सारे गहने और सोने-चाँदी के सिक्के दरवाज़े पर ढेर बना दिए। पूरे महल में दीपक जला दिए। फिर वह रात भर गीत गाकर और कहानियाँ सुनाकर पति को जगाए रखती थी।
जब यम साँप के रूप में आए
कथा में बताया जाता है कि यमराज साँप का रूप धरकर आए। लेकिन उन्हें सोने-चाँदी की चमक और दीपों की रोशनी ने इतना चकाचौंध कर दिया कि वे भीतर प्रवेश नहीं कर पाए। वे गीत सुनते हुए वहीं बैठे रहे और सुबह लौट गए।
इसी कथा से धनतेरस की शाम यम दीपम जलाने की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। इसमें घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर एक दीपक रखा जाता है। मान्यता है कि यह परिवार की सुरक्षा की प्रार्थना का प्रतीक है।
मेरे दादाजी रामस्वरूप सिंह हर धनतेरस की शाम खुद यह दीपक रखते थे। वे कहते थे, "बेटा, यह दीया डर के लिए नहीं, परिवार के प्रति प्रेम के लिए जलता है।"
धनतेरस पूजा विधि: क्रमवार संपूर्ण जानकारी
अब वह हिस्सा जिसके लिए ज़्यादातर लोग यह लेख पढ़ते हैं। पूजा की विधि सरल है, बस भाव शुद्ध होना चाहिए।
पूजा से पहले की तैयारी
सबसे पहले घर की सफाई करें, खासकर पूजा स्थान और मुख्य द्वार की। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और आम के पत्तों का तोरण लगाएं। स्वच्छता के साथ आने वाला उजाला ही असली स्वागत माना जाता है।
धनतेरस पूजन के लिए लक्ष्मी माता, गणेश जी, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि की मूर्तियाँ या चित्र रखें। पूजा की थाली में लाल कपड़ा, कलश, जल, रोली, चावल, फूल, मिठाई, धूप, दीपक और घी शामिल करें। इसके अलावा शुभता के प्रतीक के रूप में एक नया बर्तन या सिक्का भी पूजा स्थल पर रख सकते हैं।पूजन का क्रम
पहला कदम: शाम को स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। पूजा के समय पूर्व या उत्तर की ओर मुँह रखने की परंपरा है।
दूसरा कदम: चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी, लक्ष्मी जी, कुबेर और धन्वंतरि जी की स्थापना करें। कलश में जल भरकर आम के पत्ते और नारियल रखें।
तीसरा कदम: सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें। उसके बाद लक्ष्मी जी, फिर कुबेर और अंत में भगवान धन्वंतरि का पूजन करें। हर एक को रोली, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें।
चौथा कदम: घी का दीपक जलाएं और आरती करें। परिवार के सब लोग मिलकर आरती करें तो और अच्छा माना जाता है।
पाँचवाँ कदम: पूजा के अंत में प्रसाद बाँटें और घर के बड़ों का आशीर्वाद लें।
मंत्र जो इस दिन जपे जाते हैं
सरल मंत्र ही सबसे अच्छे रहते हैं। आप इनमें से कोई भी श्रद्धा से जप सकते हैं।
- माँ लक्ष्मी के लिए: "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः"
- भगवान धन्वंतरि के लिए: "ॐ धन्वंतरये नमः"
- कुबेर के लिए: "ॐ कुबेराय नमः"
जप की गिनती रखने के लिए Bhakti Vibha का 📿 Digital Mala काम आएगा। 108 की गिनती अपने आप याद रखने की झंझट नहीं रहती।
इसके बाद दीपावली के दिन की मुख्य लक्ष्मी पूजा की विधि हमारी दीपावली 2026 की पोस्ट में पढ़ सकते हैं। पंचांग में भी मान्यता है कि अमावस्या की लक्ष्मी पूजा धनतेरस की पूजा से ज़्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है।
यम दीपम: विधि और सावधानियाँ
यम दीपम धनतेरस की शाम की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण परंपरा है।
यम दीपम कैसे जलाएं
सूर्यास्त के बाद घर के मुख्य द्वार के बाहर एक चौमुखी दीपक रखा जाता है। परंपरा में यह आटे का बनाया जाता है और सरसों के तेल से जलाया जाता है। दीपक का मुख दक्षिण दिशा की ओर रखें।
कई घरों में इस दिन 13 दीपक जलाने की भी परंपरा है। कुछ परिवार एक ही दीपक जलाते हैं। जो आपके परिवार की रीति हो, वही निभाएं।
परंपरागत श्लोक
दीपक रखते समय बहुत से घरों में यह श्लोक पढ़ा जाता है:
"मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥"
यदि आप इसे पूरे उच्चारण के साथ पढ़ना चाहते हैं तो पहले अपने पंडित जी से सुन लें। भाव में शुद्धता, शब्दों से ज़्यादा ज़रूरी है।
सुरक्षा की बात
दीपक रखते समय आग की सावधानी बहुत ज़रूरी है। हवा में दीपक को पर्दों, सूखे पत्तों और बच्चों की पहुँच से दूर रखें। मिट्टी के दीपक ही चुनें, क्योंकि ये पर्यावरण के लिए भी बेहतर हैं। दीपक के पास कुछ देर रहकर देख लें कि वह सुरक्षित जल रहा है।
धनतेरस पर खरीदारी: परंपरा और समझदारी
धनतेरस का नाम सुनते ही सबसे पहले ख्याल खरीदारी का आता है। इस पर थोड़ा खुलकर बात करना ज़रूरी है।
परंपरा में क्या खरीदा जाता है
मान्यता है कि इस दिन बर्तन, सोना-चाँदी के सिक्के या गहने और झाड़ू खरीदना शुभ होता है। कई घरों में साबुत धनिया भी खरीदकर पूजा में रखा जाता है। कहा जाता है कि इस दिन की गई खरीदारी में बढ़ोतरी की भावना जुड़ी होती है।
लेकिन ध्यान दें कि परंपरा का असली भाव शुभ शुरुआत है। यह नहीं कि जेब से बढ़कर कुछ खरीदा जाए। मेरी दादी की छोटी स्टील की कटोरी भी उसी परंपरा का सम्मान थी।
समझदारी की कुछ बातें
अगर आप सोना या चाँदी खरीद रहे हैं तो कुछ बातें ध्यान रखें:
- BIS हॉलमार्क और HUID वाले गहने ही लें। भारतीय मानक ब्यूरो की जानकारी BIS की वेबसाइट पर मिल जाएगी।
- खरीदारी का बिल ज़रूर लें और संभालकर रखें।
- "सिर्फ आज का ऑफ़र" जैसे दबाव में आकर जल्दबाज़ी न करें।
- अपने बजट के भीतर ही खरीदें।
उधार लेकर खरीदारी न करें
परंपराओं में भी कहा जाता है कि इस दिन उधार लेना शुभ नहीं माना जाता। मैं इससे आगे बढ़कर कहूँगा कि त्योहार के नाम पर कर्ज़ लेकर खरीदारी करना कभी समझदारी नहीं है।
मेरे दोस्त सुनील ने एक साल धनतेरस पर कर्ज़ लेकर गहने खरीद लिए थे। त्योहार की खुशी कुछ दिन रही, लेकिन किश्तों की चिंता महीनों रही। अब वह हर साल कहता है, "भानु भाई, जितना जेब में हो, उतना ही खरीदो। बाकी भगवान पर छोड़ दो।"
यह कोई वित्तीय सलाह नहीं है। यह सिर्फ एक अनुभव की बात है। बड़ी खरीदारी या निवेश के निर्णय में किसी योग्य सलाहकार से राय ज़रूर लें।
इस दिन क्या न करें
परंपरा में इस दिन लोहे का सामान और काली चीज़ें खरीदने से बचने की बात कही जाती है। कुछ घरों में इस दिन किसी को पैसा उधार देने से भी परहेज़ किया जाता है। यह हर परिवार की अपनी रीति है, इसलिए अपने घर की परंपरा को ही प्राथमिकता दें।
धनतेरस और स्वास्थ्य: धन्वंतरि जयंती का संदेश
धनतेरस का एक पहलू ऐसा है जिस पर बाज़ार की भीड़ में कम बात होती है। वह है स्वास्थ्य।
भारत में आमतौर पर धन्वंतरि जयंती के दिन ही राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है। इसकी जानकारी आयुष मंत्रालय की वेबसाइट पर देखी जा सकती है। हर साल की तारीख के लिए वहाँ की घोषणा ज़रूर देखें।
इस धनतेरस एक छोटा संकल्प
इस साल धनतेरस पर अपने स्वास्थ्य के लिए एक छोटा सा संकल्प लें। जैसे रोज़ थोड़ी देर टहलना, समय पर भोजन करना या साल में एक बार बुनियादी स्वास्थ्य जाँच कराना। उम्र के अनुसार जाँच अलग होती है, इसलिए अपने डॉक्टर से सलाह लें।
परिवार के बुज़ुर्गों की सही उम्र जानने के लिए Bhakti Vibha का Age Calculator इस्तेमाल कर सकते हैं। फिर उसी के अनुसार डॉक्टर से बातचीत की जा सकती है।
यह लेख कोई चिकित्सकीय सलाह नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए योग्य डॉक्टर से राय लें।
धन को बाँटना भी एक परंपरा है
हमारी संस्कृति में धन का मतलब सिर्फ जमा करना नहीं, बाँटना भी है। इस दिन कई लोग जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या दीपक दान करते हैं।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद इसकी सुंदर मिसाल है, जहाँ हर किसी को बिना भेदभाव के भोजन मिलता है। उस परंपरा की पूरी जानकारी हमने जगन्नाथ पुरी मंदिर गाइड में लिखी है।
मेरे नाना शिवप्रसाद जी हर धनतेरस पर गाँव के किसी ज़रूरतमंद परिवार के घर दीपक और तेल पहुँचवाते थे। वे कहते थे, "बेटा, जो दीया दूसरे के घर जलता है, उसकी रोशनी अपने घर तक भी लौटकर आती है।"
बच्चों को धनतेरस का सही अर्थ कैसे सिखाएं
धनतेरस एक अच्छा मौका है बच्चों को पैसे का मूल्य और बचत की आदत सिखाने का। यह पर्व सिर्फ खरीदारी का नहीं, सीख का भी है।
मेरे दोस्त राजू हर धनतेरस पर अपने बच्चों को एक छोटा गुल्लक देता है। वह कहता है, "इस साल इसमें जितना बचा पाओगे, अगले धनतेरस पर हम साथ में देखेंगे।" बच्चे उत्साह से सालभर बचत करते हैं।
बच्चों में ऐसे संस्कार डालने की बात हमने ध्रुव की कथा में भी की है, जहाँ एक माँ की सीख ने पाँच साल के बालक का पूरा जीवन दिशा दे दी।
दीपोत्सव के आगे के दिन
धनतेरस के बाद नरक चतुर्दशी यानी छोटी दीपावली आती है और फिर दीपावली 8 नवंबर 2026 को है। इसके बाद गोवर्धन पूजा और भाई दूज के पर्व आते हैं। इनकी सटीक तारीखें अपने स्थानीय पंचांग से जाँच लें।
दीपावली के कुछ ही दिन बाद छठ पूजा आती है। इस साल छठ 13 से 16 नवंबर 2026 तक है। उसकी पूरी विधि हमारी छठ पूजा 2026 की पोस्ट में पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
धनतेरस 2026 कब है?
धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है। इसके दो दिन बाद, रविवार 8 नवंबर 2026 को दीपावली है।
धनतेरस की पूजा किस समय करनी चाहिए?
पूजा प्रदोष काल में की जाती है, जो सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक रहता है। सटीक समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए अपने शहर का समय Drik Panchang जैसे स्रोत से देखें।
यम दीपम क्या है?
यम दीपम धनतेरस की शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर जलाया जाने वाला एक दीपक है। इसे परिवार की सुरक्षा की प्रार्थना के रूप में जलाया जाता है।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
परंपरा में बर्तन, सोना-चाँदी के सिक्के या गहने, झाड़ू और साबुत धनिया खरीदना शुभ माना जाता है। लेकिन खरीदारी हमेशा अपने बजट के भीतर करें।
धनतेरस पर किसकी पूजा होती है?
इस दिन माँ लक्ष्मी, कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा होती है। साथ ही शाम को यम दीपम भी जलाया जाता है।
धन्वंतरि कौन हैं?
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद के देवता माना जाता है। कथा के अनुसार समुद्र मंथन में वे अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।
क्या धनतेरस पर सोना खरीदना ज़रूरी है?
नहीं, यह ज़रूरी नहीं है। परंपरा में एक छोटा बर्तन या सिक्का भी शुभ माना जाता है। श्रद्धा और भाव खरीदारी की कीमत से ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं।
जाते जाते...
दोस्तों, धनतेरस हमें याद दिलाती है कि असली धन सिर्फ तिजोरी में नहीं रखा जाता। स्वस्थ शरीर, शांत मन, अपनों का साथ और बाँटने की आदत, ये सब भी धन ही हैं।
इस साल धनतेरस पर खरीदारी जरूर कीजिए, लेकिन अपने बजट में रहकर। एक दीपक अपने घर के बाहर रखिए और एक किसी जरूरतमंद के घर। और जाने से पहले अपने स्वास्थ्य के लिए एक छोटा वादा भी खुद से कर लीजिए।
दादी सावित्री देवी की वह बात आज भी कानों में गूँजती है, "त्योहार हैसियत से नहीं, श्रद्धा से मनता है।"
शुभ धनतेरस! 🪔🙏
— भानु प्रताप सिंह, Bhakti Vibha
Disclaimer
इस लेख में दी गई तिथियाँ और मुहूर्त पारंपरिक पंचांग और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। पूजा का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग या पुरोहित से पुष्टि करें। खरीदारी, सोना-चाँदी या निवेश से जुड़ी बातें सिर्फ सामान्य जानकारी हैं और वित्तीय सलाह नहीं हैं। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी निर्णय से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श लें। Bhakti Vibha किसी भी व्यक्तिगत परिणाम के लिए उत्तरदायी नहीं है।

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