Shri Shani Chalisa Lyrics in Hindi: श्री शनि चालीसा पाठ (दोहा-चौपाई) – विधि और लाभ
"नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥"
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि ग्रह - Wikipedia को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है।
अक्सर लोग शनिदेव का नाम सुनते ही डर जाते हैं, लेकिन सच यह है कि शनिदेव 'क्रूर' नहीं, बल्कि 'न्यायधीश' (Judge) हैं। वे हमें दंड नहीं देते, बल्कि हमारे कर्मों का सही हिसाब करते हैं।
यदि आप जीवन में संघर्ष, साढ़े साती या ढैय्या से गुजर रहे हैं, तो डरने की बजाय श्री शनि चालीसा (Shani Chalisa) का पाठ करें। यह पाठ आपको मानसिक शांति और मुसीबतों से लड़ने की ताकत देता है।
यहाँ प्रस्तुत है संपूर्ण और शुद्ध शनि चालीसा:
॥ श्री शनि चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज। करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥
॥ चौपाई ॥
जयति जयति शनिदेव दयाला। करत कष्ट ऋषियन प्रतिपाला॥
जय जय अदित्य सुत प्रभु साहु। मुक्तिहु नाथ दुष्ट की राहु॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥
परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमकै। हिय माल मुक्तन मणि दमकै॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥
पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुख भंजन॥
सौरी, मन्द, शनि, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥
पर्वतहू तृण होइ निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥
राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥
बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥
लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥
रावण की गति-मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी॥
भारी दशा निकृष्ट दिखाओ। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुँ भरे डोम घर पानी॥
तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी-मीन कूद गई पानी॥
श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥
तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रौपदी होति उघारी॥
कौरव के भी गति मति मारि। युद्ध महाभारत करि डारि॥
रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥
शेष देव-लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥
वाहन प्रभु के सात सुजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥
जम्बुक सिंह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैं॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा॥
जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥
तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लोह चाँदी अरु तामा॥
लोह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥
समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सुख मंगल भारी॥
जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुँ न दशा निकृष्ट सतावै॥
अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥
पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥
॥ दोहा ॥
पाठ शनिश्चर देव को, की हों 'भक्त' तैयार। करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥
जो स्तुति दशरथ जी कियो, सम्मुख शनि निहार। सरस सुभास में वही, ललिता लिखे मंझार॥
शनिदेव भगवान शिव के परम भक्त और शिष्य हैं। शिवजी के पवित्र धाम काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath) का इतिहास और महत्व यहाँ पढ़ें।
शनि चालीसा पाठ की सही विधि (Shani Puja Vidhi)
शनिदेव अनुशासन (Discipline) पसंद करते हैं। इसलिए उनकी पूजा में विधि और नियमों का पालन करना जरूरी है।
1. सही समय (Time):
2. रंग और पहनावा (Dress Code):
3. पूजा सामग्री (Requirements):
सरसों का तेल (Mustard Oil)
काले तिल (Black Sesame)
काला कपड़ा
लोहे की कोई वस्तु (कीला या छल्ला)
नीले फूल (अपराजिता)
4. पूजा की प्रक्रिया (Process):
शाम को स्नान करके पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
दीपक में थोड़े से काले तिल डालें।
पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठें (शनिदेव पश्चिम दिशा के स्वामी हैं)।
शनि चालीसा का पाठ मध्यम स्वर में करें।
अंत में "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।
शनि चालीसा पढ़ने के लाभ (Benefits)
साढ़े साती और ढैय्या में राहत: जिन लोगों पर शनि की साढ़े साती चल रही है, उन्हें चालीसा पढ़ने से मानसिक शांति मिलती है और कष्ट कम होते हैं।
कोर्ट-कचहरी और शत्रु भय: शनिदेव न्याय के देवता हैं। यदि आप सच्चे हैं और कोर्ट-कचहरी जैसी परिस्थितियों में मानसिक बल और धैर्य मिलता है
यात्रा के समय मन में सावधानी और आत्मविश्वास बना रहता है: शनिवार को यात्रा करने से पहले चालीसा का पाठ करने से 'लोह चरण' का प्रकोप कम होता है और सुरक्षा की भावना और सावधानी बनी रहती है।
नौकरी और बिजनेस: अगर कड़ी मेहनत के बाद भी फल नहीं मिल रहा, तो यह पाठ आपके रुके हुए कार्यों में सकारात्मक प्रयास और धैर्य बनाए रखने में सहायक होता है।
निष्कर्ष: डरें नहीं, भरोसा रखें
दोस्तों, शनिदेव केवल दंड नहीं देते, वे हमें जीवन जीने का सही तरीका सिखाते हैं। वे हमें यह बताते हैं कि "जैसा कर्म करोगे, वैसा फल मिलेगा।"
अगर आपका मन साफ़ है और आप किसी का बुरा नहीं करते, तो आपको शनिदेव से डरने की रत्ती भर भी जरूरत नहीं है। वे आपके सबसे बड़े रक्षक बन जाएंगे।
शनिवार की शाम को एक दीपक जलाएं, चालीसा पढ़ें और अपने कर्मों को अच्छा रखें। शनिदेव की कृपा आप पर अवश्य होगी।
जय शनिदेव! 🙏🌑
यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। यह किसी चिकित्सीय, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है।

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