पूजा-पाठ के जरूरी नियम: जानिए घर में पूजा करते समय ध्यान रखने योग्य 6 महत्वपूर्ण बातें- Essential rules for worship: Learn 6 important things to keep in mind while performing puja at home.
दोस्तों, हम और आप बचपन से अपने घरों में पूजा-पाठ होते देख रहे हैं। घंटी की आवाज़, अगरबत्ती की खुशबू और "ॐ जय जगदीश हरे" की गूंज... यह सब हमारे जीवन का हिस्सा है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि कई बार महीनों और सालों तक पूजा करने के बाद भी हमारे घर के हालात क्यों नहीं बदलते? क्यों मन को शांति नहीं मिलती?
शास्त्रों में कहा गया है— "विधिहीनं सृष्टान्नं मंत्रहीनं अदक्षिणम्।" यानी, बिना सही विधि के की गई पूजा, बिना घी के भोजन जैसी होती है—पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने में बाधा आ सकती है।। कई बार हम अनजाने में भगवान की मूर्ति गलत रख देते हैं, या दिया गलत दिशा में जला देते हैं। ये गलतियां देखने में राई बराबर लगती हैं, लेकिन इनका असर पहाड़ जैसा होता है।
आज इस पोस्ट में हम आपको शास्त्रों में बताए गए इन 6 जरूरी नियमों के बारे में जानेंगे।, जिन्हें अगर आपने सुधार लिया, तो वही पूजा जो आज तक "बेअसर" थी, पूजा का सकारात्मक प्रभाव अनुभव होने लगेगा।
1. ज़मीन पर बैठकर पूजा करना (Sitting on Bare Floor)
यह सबसे आम गलती है जो 90% लोग करते हैं। जल्दबाजी में हम नंगे फर्श पर बैठकर ही हाथ जोड़ लेते हैं। क्यों गलत है? विज्ञान और शास्त्र दोनों कहते हैं कि जब हम भजन या मंत्र जाप करते हैं, तो हमारे शरीर में एक दिव्य ऊर्जा (Cosmic Energy) पैदा होती है। अगर हम ज़मीन पर बिना आसन के बैठे हैं, तो "अर्थिंग" (Earthing) की वजह से वह सारी ऊर्जा ज़मीन के अंदर चली जाती है और हमारे पास कुछ नहीं बचता। सही तरीका: हमेशा ऊनी आसन, कुशा का आसन या कम्बल बिछाकर ही पूजा करें। इससे आपकी ऊर्जा आपके शरीर में ही लॉक (Lock) रहेगी।
2. दीपक को सीधा ज़मीन पर रखना (Placing Lamp on Floor)
हम अक्सर आरती करते समय या पूजा के वक्त दीपक को सीधे फर्श या थाली में ऐसे ही रख देते हैं। शास्त्रों में दीपक को "अग्नि देव" का रूप माना गया है। उन्हें सीधा ज़मीन पर रखना उनका अपमान है। सही तरीका: दीपक के नीचे हमेशा थोड़े से चावल (अक्षत) या फूलों की पंखुड़ियां रखें। इसे "आसन देना" कहते हैं। ऐसा करने से धन की देवी माँ लक्ष्मी स्थिर होती हैं।
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3. अगरबत्ती का प्रयोग (Using Bamboo Incense)
ज्यादातर घरों में बांस की बनी अगरबत्ती जलाई जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिंदू धर्म में बांस (Bamboo) जलाना सख्त मना है? बांस का इस्तेमाल अर्थी (Funeral) में होता है, शुभ कार्यों में नहीं। शास्त्रों में बांस जलाना वर्जित माना गया है, और शास्त्रों में इसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। सही तरीका: अगरबत्ती की जगह हमेशा धूप-बत्ती (Dhoop) या दीपक का इस्तेमाल करें। यह वातावरण को शुद्ध करता है।
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4. खंडित (टूटी हुई) मूर्तियां रखना (Broken Idols)
कई बार हम भावनाओं में बहकर टूटी हुई मूर्तियों को भी मंदिर में रखे रहते हैं। जैसे गणेश जी की सूंड थोड़ी सी टूट गई हो या किसी तस्वीर का कांच चटक गया हो। वास्तु शास्त्र के अनुसार, खंडित मूर्ति शास्त्रों में इसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है।। ऐसी मूर्तियों की पूजा करने से घर में क्लेश और मानसिक तनाव बढ़ता है। सही तरीका: ऐसी मूर्तियों को आदर के साथ किसी नदी में प्रवाहित कर दें और नई मूर्ति स्थापित करें।
5. बासी फूल चढ़ाना (Stale Flowers)
कई बार हम सुबह के चढ़ाए हुए फूल शाम तक मंदिर में ही छोड़ देते हैं, या बासी फूल भगवान को चढ़ा देते हैं। याद रखिये, भगवान को सिर्फ़ "ताज़गी" पसंद है। सूखे और बासी फूल घर में नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) फैलाते हैं। इन्हें पूजा के तुरंत बाद या अगली सुबह होने से पहले हटा देना चाहिए। (सिर्फ़ तुलसी दल (Tulsi leaves) और बेलपत्र ही ऐसे हैं जो बासी नहीं माने जाते और उन्हें धोकर दोबारा चढ़ाया जा सकता है।)
6. एक हाथ से प्रणाम करना (Greeting with One Hand)
आजकल का मॉडर्न स्टाइल है—मंदिर के आगे से निकले और एक हाथ सिर पर लगाकर प्रणाम कर लिया। शास्त्रों में इसे अहंकार का प्रतीक माना गया है। एक हाथ से प्रणाम करने से पुण्य क्षीण (खत्म) हो जाता है। सही तरीका: जब भी भगवान के सामने आएं, दोनों हाथ जोड़कर, सिर झुकाकर प्रणाम करें। यह समर्पण का भाव है।
कैसे पता चले कि पूजा स्वीकार हो गई? (Signs of Accepted Prayer)
(यह बहुत ही रहस्यमयी जानकारी है)
अगर आप ऊपर बताई गई गलतियां सुधार लेते हैं, तो आपको कुछ ही दिनों में संकेत मिलने लगेंगे:
पूजा करते समय दीपक की लौ का अचानक ऊपर उठना।
अचानक आँखों से आंसू आ जाना (बिना किसी दुख के)।
मानसिक पूजा: सबसे बड़ा उपाय (The Secret Remedy)
अगर आप बीमार हैं, सफ़र में हैं, या विधि-विधान नहीं जानते, तो क्या करें? तब काम आती है— "मानसिक पूजा" (Mental Worship)। आँखें बंद करें और मन ही मन सोचें कि आप भगवान को सोने के सिंहासन पर बैठा रहे हैं, उन्हें गंगाजल से नहला रहे हैं और हीरे-मोती चढ़ा रहे हैं। शास्त्र कहते हैं कि "द्रव्य" (सामग्री) से बड़ी "भावना" होती है। कलयुग में भगवान भाव के भूखे हैं।
दोस्तों, पूजा कोई "टास्क" (Task) नहीं है जिसे बस निपटाना है। यह आत्मा का परमात्मा से मिलन है। कल से जब भी आप मंदिर में दिया जलाएं, तो इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें। देखियेगा, जिस घर में नियम और पवित्रता होती है, वहां ईश्वर बिना बुलाए चले आते हैं।



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